यह एक ऐसी दुनिया है जहाँ लोग पाखंडी हैं। हम नौटंकी करते हैं, दोस्त, परिवार और रिश्तेदार बनने-रहने की। यह नाटक कब तक चलता है, यह पात्रों पर निर्भर करता है।
यहाँ हर प्रकार का नाटक मिलेगा और हर तरह के पात्र भी। माता-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी, मामा-मामी, चाचा-चाची... यहाँ तक कि हर किस्म के दोस्त भी मिलते हैं—पक्के दोस्त, कच्चे दोस्त, स्कूल वाले दोस्त, कॉलेज वाले दोस्त, ऑफिस वाले दोस्त, हर तरह के दोस्त।
बस ध्यान रहे, इस नौटंकी में वे लोग नहीं मिलेंगे जो नाटक करना पसंद नहीं करते, जिन्होंने रिश्तेदार, परिवार, दोस्त या हमदर्द का किरदार निभाने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि अगर इंसानियत हो, तो नौटंकी में वक्त बर्बाद नहीं करना पड़ता।
यदि आप गलती से इस नाटक को सच मान लें और उन पात्रों पर भरोसा कर बैठें, तो यह नाटक आपको मुँह के बल गिराकर याद दिलाता है, “देखो, ज्यादा गले मत पड़ो। नाटक है, नाटक! हमसे प्यार, भरोसा या मदद की उम्मीद मत करना। समझे, वरना सीधे नौटंकी से बाहर कर देंगे।”
आवारा बादल

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