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इंसान एक खतरनाक और भयानक जानवर बनता जा रहा है?

 

इंसान और जानवर को अलग करने वाली चीज क्या है? दिमाग, सही कहा ना? दिमाग का होना सिर्फ एक शरीर का हिस्सा नहीं, बल्कि इसका मतलब है कि इंसान अपने सोचने-समझने की क्षमता का इस्तेमाल करेगा। अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने, नए विकास करने, खुद को समझने और हर चीज के पीछे के कारण को जानने के लिए। और इस सबकी शुरुआत होती है सवाल पूछने से।

लेकिन जानवर? वे बस खाते हैं, सोते हैं, प्रजनन करते हैं और यही चक्र दोहराते रहते हैं। उनके अंदर भावनाएं होती हैं, लेकिन वो गहराई से सोचने, विचार करने या किसी योजना को बनाने की क्षमता नहीं रखते।

इंसान और जानवर में बस एक पतली सी रेखा का फर्क है। दिक्कत यह है कि यह रेखा इंसान खुद ही मिटाता जा रहा है। हम कभी बंदर से इंसान बने थे, लेकिन अब इंसान से वापस बंदर... या शायद उससे भी खतरनाक और भयानक प्राणी बनने की राह पर हैं।

हम सदियों से बाबा, धर्मगुरु, और तथाकथित 'गॉडमैन' को अपने सवालों के जवाब ढूंढने के लिए फॉलो करते आ रहे हैं। धीरे-धीरे यह फॉलो करने का रिश्ता इतना गहरा हो जाता है कि हम सवाल पूछना ही बंद कर देते हैं और सिर्फ उनके चरणों की छाया में जीने लगते हैं।

यहाँ तक फिर भी ठीक है...समस्या तब शुरू होती है जब कोई और सवाल पूछता है, इंसान होने का सही मतलब समझने और समझाने की कोशिश करता है, और हम बुरा मान कर उसे मारने तक के लिए तैयार हो जाते हैं।

किसी को फॉलो करना, विश्वास करना, पूजा करना गलत नहीं है, जब तक वह सिर्फ आपकी निजी आस्था तक सीमित है। लेकिन जिस पल आपके गुरु, आपकी श्रद्धा नफरत फैलाने लगती है, झूठी कहानियां गढ़ने लगती है, और सवाल पूछने वाले को 'धर्मद्रोही' बताने लगती है , उसी पल आप जानवर बन जाते हैं और आपका गुरु पाखंडी।

इसलिए, इंसान और जानवर के बीच की इस रेखा को बनाए रखिए। पढ़िए, सोचिए और सबसे जरूरी  सवाल पूछिए। 

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