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सोशल मीडिया: दोस्त या दुश्मन?

 

मैं पहली बार 2016 में सोशल मीडिया की दुनिया से रूबरू हुई। तब मैं स्कूल में थी, और मेरे आसपास के सभी बच्चे फेसबुक इस्तेमाल करते थे। उन्हें देखकर मेरा भी फेसबुक के प्रति रुझान बढ़ा, और घरवालों से छुपकर मैंने अपनी पहली फेसबुक आईडी 'प्रिया शर्मा' के नाम से बनाई। कुछ समय बाद, मैंने नाम बदलकर अपना असली नाम 'प्रियंका' कर लिया। फेसबुक ने मेरे जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और मुझे वहां कुछ अच्छे और सच्चे दोस्त मिले, जो 2025 में भी मेरे साथ हैं।

लेकिन वक़्त के साथ फेसबुक पुराना लगने लगा और लोग इंस्टाग्राम की तरफ़ बढ़ने लगे। 2017 में, मैंने भी इंस्टाग्राम पर अपना अकाउंट बनाया। धीरे-धीरे, फेसबुक को सिर्फ़ बड़े-बुजुर्गों के लिए और इंस्टाग्राम को युवाओं के लिए मान लिया गया। हालांकि, सच कहूं तो आज भी मुझे फेसबुक ज्यादा पसंद है, भले ही अब मैं उसे ज्यादा इस्तेमाल नहीं करती।

शुरुआत में, सोशल मीडिया सबको अच्छा लगता है। आपको लगता है कि आप नई चीज़ें सीख रहे हैं, नए लोगों से मिल रहे हैं, और दुनिया की खबरें रख रहे हैं। यह सच भी है, लेकिन सोशल मीडिया का दूसरा पक्ष भी है,जो खतरनाक और डरावना है।

फेसबुक छोड़ने के बाद, मैं इंस्टाग्राम की आदी हो गई। कई बार कोशिश की इसे बंद करने की, 10 दिन, 1 महीना, यहाँ तक कि 6 महीने तक भी ब्रेक लिया, लेकिन हर बार किसी न किसी बहाने से वापस लौट आई। सोशल मीडिया की यह लत अजीब है आप सोचते हैं कि बस एक अपडेट ले रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह आपके पूरे समय पर कब्ज़ा कर लेता है।

अब मुझे इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करते हुए 8 साल हो गए हैं, और जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो महसूस होता है कि इससे कुछ खास नहीं मिला। उल्टा, इसने मेरा सबसे कीमती खजाना—मेरा समय छीन लिया। मैंने सोशल मीडिया को हमेशा जागरूकता और पॉजिटिविटी फैलाने के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन अब लगता है कि इसका कोई फायदा नहीं है। जिन लोगों को समझना चाहिए, वे पहले से ही समझते हैं, और जिन्हें बदलाव की जरूरत है, वे सिर्फ़ उल्टा-सीधा बोलकर वक्त बर्बाद करते हैं।

दरअसल, जिन लोगों को सही बातें समझने की जरूरत होती है, वे 30 सेकंड की रील से कभी नहीं समझ सकते। अच्छी बातें, ज्ञान और आदतें समय मांगती हैं। अगर कोई इंसान 30 मिनट में ज्ञान हासिल करना चाहता है, तो वह कभी सही मायने में समझ नहीं सकता। अगर कोई व्यक्ति किताबें, रिसर्च पेपर पढ़ने, या किसी टॉपिक पर गहराई से सोचने के लिए समय नहीं निकाल सकता, तो उसका और उसके आसपास के लोगों का भविष्य खतरे में है।

आज सोशल मीडिया सिर्फ़ दोस्तों और परिवार को जोड़ने का माध्यम नहीं रह गया है। यह अब लोगों को अलग करने, समूहों में बांटने, नफ़रत फैलाने और झूठी ख़बरों को बढ़ावा देने का हथियार बन गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लोग जानते हुए भी इसकी चपेट में आ जाते हैं।

इंस्टाग्राम, गूगल, यूट्यूब, फेसबुक—ये सभी प्लेटफ़ॉर्म हमारे दिमाग़ से खेलते हैं और हमें अपना गुलाम बना चुके हैं। इनका पूरा बिज़नेस मॉडल इसी पर आधारित है कि हम जितना ज़्यादा समय सोशल मीडिया पर बिताएं, उतना ज़्यादा इनका फायदा हो।

याद रखें, इस दुनिया में कोई चीज़ मुफ्त नहीं होती। सोशल मीडिया भी मुफ्त नहीं है यह हमारी सबसे कीमती चीज़ ले रहा है—हमारा समय। और बदले में हमें इसकी लत लगाकर मानसिक रूप से कमजोर बना रहा है।

इसीलिए अब मैं अपना सबसे कीमती वक़्त सिर्फ़ खुद के लिए, अपने दोस्तों और परिवार के लिए रखना चाहती हूँ ना कि किसी सोशल मीडिया पोस्ट या रील के लिए।

शायद आपको मेरी बातें अजीब लगें, लेकिन अगर आप रिसर्च देखें, तो पाएंगे कि सोशल मीडिया की वजह से बच्चे अपना बचपन नहीं जी पा रहे, वे डिप्रेशन में हैं, उनके दोस्त नहीं हैं, वे असली जिंदगी में सामाजिक बनने की कोशिश कर रहे हैं, और दुखद रूप से, कई बच्चों ने अपनी जान तक दे दी है।

सोशल मीडिया हमें जोड़ता है या तोड़ता है,यह तय करना अब हमारे हाथ में है।

टिप्पणियाँ

  1. Badal social media leave mat karo time kam do aur jo kaam kar rhi ho usse countinue karti rho awareness mei time lagta hai aur tumara toh kaam bhi yahi hai awareness baaki tumara dicision hai 👍💯

    जवाब देंहटाएं
  2. Hey आवारा बादल पहली बार तुमसे सोशल साइट पर ही मिला इसीलिए एक जुड़ाव सा रहता है 🙂
    मै ज्यादा तो नहीं कहूंगा बस इतना की समय बचना और अपनो के साथ समय बिताना आवश्यक है, तुमने जो डिसीजन लिया है सोच के लिया होगा किसी चीज को पूरी तरह से खत्म नहीं करना चाहिए एक स्पेस थोड़ा रखना चाहिए आज के समय कभी कभी वो सहायक होती है, बाकी जो तुम्हे सही लगे,
    I stand with u...
    Ur Translator 🥰

    जवाब देंहटाएं

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