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स्वर्ग का सपना और समाज की सच्चाई

 



एक गांव था जिसका नाम आनंदपूरा था। इस गांव में दो प्रकार के लोग रहते थे। एक समूह था अंशुमाली और दूसरा समूह था उदक। सभी लोग खुशहाल और अच्छे से रहते थे।
लेकिन एक दिन अंशुमाली समूह के एक आदमी, अजय, का अपने घर में झगड़ा हो गया। उसके बच्चों ने उसका साथ नहीं दिया और अपनी मां का साथ दिया, क्योंकि गलती अजय की थी। अजय गुस्से में घर से बाहर चला जाता है और अकेले बैठकर बहुत सोचता है। वह सोचता है कि "क्या सोचते हैं लोग, मैं मर्द हूं, तो सबको मेरी सुननी चाहिए।"

फिर उसे एक विचार आता है कि क्यों न एक ऐसी किताब बनाई जाए, जिसमें औरतों को उनकी औकात पता चले, और उसमें सभी नियम लिखे जाएं कि कौन, कब, क्या करेगा, किसका क्या धर्म होगा। इस किताब में पुरुषों को सर्वोत्तम बताया जाए, और औरतों के लिए सिर्फ घर के काम, शारीरिक सुख, बच्चे पैदा करना और चुपचाप रहना लिखा जाए।

अजय का एक दोस्त भी था, सुहान, जो कहता है, "ऐसा करो, हम सबके लिए एक पैटर्न बना देते हैं, जिससे सब नियमों के तहत चले और डिसिप्लिन हो जाएं।"
फिर उन्होंने एक किताब लिखी और एक दिन बैठक में सबको बताया कि उनके एक बड़े आदमी ने यह किताब दी है, जिसमें सबके लिए नियम हैं। जो इसे मानेगा, उसे मरने के बाद स्वर्ग मिलेगा। अजय और सुहान ने यह विचार फैलाना शुरू कर दिया, लेकिन उदक समूह के लोग इस किताब और उसके नियमों को मानने से इंकार कर देते हैं और कहते हैं, "ठीक है, तुम इसे मानो, हम इसके मुताबिक नहीं रह सकते।"

कुछ सालों बाद, अंशुमाली समूह के लोगों को यह विचार आता है कि हम तो सब कुछ नियमों के अनुसार करते हैं, हमारी औरतें भी अपने मुंह नहीं खोल सकतीं, हम कितने महान हैं! और उदक के लोग देखो, उनकी औरतें अपने पतियों से मजाक करती हैं, बिना किसी नियम के रहती हैं। इन लोगों को सुधारने की जरूरत है।

फिर अंशुमाली समूह ने उस किताब में एक संशोधन किया और बिना उदक के लोगों को बताए, उनके लिए नियम बना दिए। इनमें यह लिखा था कि उदक के लोग नीच हैं, उन्हें इंसान का दर्जा नहीं दिया जाएगा, और उन्हें बोलने, साथ रहने, पढ़ने जैसी चीजों पर पाबंदी लगा दी गई। धीरे-धीरे यह नियम फैलने लगे और भेदभाव बढ़ने लगा। उदक के लोग अपमानित होने लगे और उनके साथ अन्याय होने लगा।

अब सवाल यह है कि:-
1.क्या आपको लगता है ऐसी किताब समाज में होनी चाहिए?
2.क्या यह तब तक ठीक था जब तक यह अंशुमाली समाज तक सीमित था?
3.क्या कोई किताब किसी को इंसान होने या न होने का अधिकार ले सकती है?
4.औरत गुलाम क्यों बनायीं जाती हैं?


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